शिक्षकों की चिंता और उनके भविष्य को लेकर उठे सवाल अब एक नए मोड़ पर पहुंच गए हैं। लाखों परिवारों के दिलों की धड़कन इस समय बढ़ी हुई है, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट के हालिया आदेश ने शिक्षकों की नौकरी पर संकट खड़ा कर दिया है। इसी बीच उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने बड़ा निर्णय लिया है—सरकार अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ रिवीजन याचिका दाखिल करेगी।
शिक्षकों की मेहनत और अनुभव पर सवाल क्यों?
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि हमारे शिक्षक सिर्फ पढ़ाते नहीं, बल्कि बच्चों के भविष्य को गढ़ते हैं। वर्षों का अनुभव और लगातार सरकार द्वारा दिया गया प्रशिक्षण उनकी सबसे बड़ी ताकत है। ऐसे में उनकी योग्यता को सिर्फ इस आधार पर खारिज करना कि उन्होंने TET पास नहीं किया, न्यायसंगत नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट का आदेश और बढ़ती बेचैनी
1 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा था कि पूरे देश में शिक्षकों के लिए TET पास करना अनिवार्य होगा। आदेश यह भी था कि जो शिक्षक TET पास नहीं कर पाएंगे, उन्हें नौकरी छोड़नी पड़ेगी। इस फैसले ने अचानक लाखों शिक्षकों को गहरी चिंता में डाल दिया। खासकर उत्तर प्रदेश में, जहां लगभग दो लाख शिक्षक ऐसे हैं जिन्होंने TET पास नहीं किया है।
यूपी में क्यों सबसे बड़ा असर?
राज्य में पहली बार TET परीक्षा 13 नवंबर 2011 को आयोजित की गई थी। उससे पहले नियुक्त हुए शिक्षक बिना TET के ही पढ़ा रहे थे। यही वजह है कि आज सबसे ज्यादा प्रभावित शिक्षक उत्तर प्रदेश में हैं। यह संख्या किसी भी राज्य से अधिक है और यही कारण है कि यूपी सरकार को मजबूरन इस फैसले के खिलाफ खड़ा होना पड़ा।
योगी सरकार की पहल और शिक्षकों की उम्मीद
यूपी पहला राज्य है जिसने इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में रिवीजन दाखिल करने का निर्णय लिया है। यह कदम उन लाखों शिक्षकों के लिए उम्मीद की किरण है, जो अपनी नौकरी और अपने परिवार के भविष्य को लेकर चिंतित थे। सरकार का यह रुख न केवल शिक्षकों का मनोबल बढ़ाता है बल्कि यह भी दर्शाता है कि उनके अनुभव और मेहनत को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।




