देवरिया। शहर के गोरखपुर रोड स्थित ओवरब्रिज के नीचे बनी मजार की जमीन को लेकर एक बड़ा और सनसनीखेज खुलासा हुआ है। बंजर सरकारी भूमि को फर्जी दस्तावेजों और गलत राजस्व इंद्राज के जरिए मजार के नाम दर्ज कराने के मामले में पुलिस ने छह लोगों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। यह कार्रवाई लेखपाल की तहरीर पर की गई है।
मामला तब सामने आया जब जून 2025 में देवरिया सदर विधायक ने मजार की भूमि को लेकर सवाल उठाए। इसके बाद जिलाधिकारी के निर्देश पर पूरे प्रकरण की गहन जांच कराई गई। जांच में सामने आया कि वर्ष 1993 में बिना किसी वैध आधार के बंजर भूमि को मजार के नाम दर्ज कर दिया गया था। राजस्व अभिलेखों में इस इंद्राज के समर्थन में कोई वैधानिक दस्तावेज या आदेश नहीं पाया गया।
एएसडीएम कोर्ट ने भूमि को घोषित किया बंजर
मामला एएसडीएम न्यायालय में चला, जहां सुनवाई के बाद करीब तीन माह पूर्व न्यायालय ने स्पष्ट रूप से उक्त भूमि को बंजर/सरकारी भूमि घोषित कर दिया। साथ ही, न्यायालय ने फर्जी इंद्राज कराने और सरकारी भूमि के दुरुपयोग में शामिल लोगों के खिलाफ विधिक कार्रवाई के निर्देश भी दिए थे।
लेखपाल की तहरीर पर एफआईआर
न्यायालय के आदेश के अनुपालन में लेखपाल विनय सिंह ने कोतवाली पुलिस को तहरीर दी। इसके आधार पर पुलिस ने
- तत्कालीन सदर शाहबुद्दीन,
- तत्कालीन नायब सदर इरशाद,
- नाजिम मुबारक अली,
- अख्तर वारसी,
- तत्कालीन कानूनगो राधेश्याम उपाध्याय,
- तथा लेखपाल रामानुज सिंह
के खिलाफ धारा 420, 467, 468, 471 और 120-बी के तहत मुकदमा दर्ज किया है।
सरकारी अभिलेखों से छेड़छाड़ की पुष्टि
पुलिस अधिकारियों के अनुसार प्रारंभिक जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि सरकारी राजस्व अभिलेखों में जानबूझकर हेराफेरी कर भूमि का स्वरूप बदला गया। इसका मकसद सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे को वैध रूप देना था।
पुलिस ने बताया कि मुकदमा दर्ज होने के बाद अब दस्तावेजों की प्रामाणिकता, तत्कालीन अधिकारियों की भूमिका, लाभार्थियों की पहचान और पूरे नेटवर्क की जांच की जा रही है। यदि जांच में अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आती है, तो उनके खिलाफ भी कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।



