भटनी। मिश्रौली दीक्षित गांव में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन भक्ति और श्रद्धा का माहौल पूरी तरह चरम पर दिखाई दिया। कथा व्यास पंडित वागीश मणि त्रिपाठी ने गूढ़ आध्यात्मिक प्रसंगों के साथ ऋषि कश्यप की पत्नियों व उनकी संतान से जुड़ी पौराणिक कथाओं का विशद वर्णन किया।
उन्होंने बताया कि ब्रह्मा जी के मानस पुत्र ऋषि कश्यप ने दक्ष प्रजापति की 13 कन्याओं से विवाह किया था, जिनमें प्रमुख थीं – अदिति, दिति, दनु, कद्रू, विनता, सुरसा आदि। इनसे ही सृष्टि के विविध वर्गों की उत्पत्ति हुई। अदिति से देवताओं का, दिति से दैत्यों का, दनु से दानवों का, कद्रू से नागों का और विनता से गरुड़ और अरुण का जन्म हुआ। इन प्रसंगों के माध्यम से कथा वाचक ने यह संदेश दिया कि सृष्टि का विस्तार एक विराट योजना का हिस्सा है, जिसमें प्रत्येक जीव का एक विशेष उद्देश्य है। कथा के आगे बढ़ते क्रम में पंडित वागीश मणि त्रिपाठी ने सती और भगवान शंकर की कथा का भी भावुक वर्णन किया। उन्होंने बताया कि कैसे दक्ष प्रजापति के यज्ञ में भगवान शिव को आमंत्रित न करने और उनके अपमान से आहत होकर सती ने स्वयं को अग्निकुंड में समर्पित कर दिया। इस प्रसंग ने श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। कथा में भगवान शंकर का तांडव, वीरभद्र का प्राकट्य और दक्ष यज्ञ का विध्वंस भी रोचक ढंग से प्रस्तुत किया गया। जैसे-जैसे कथा आगे बढ़ती गई, श्रोताओं की भीड़ भी बढ़ती गई। ‘हर हर महादेव’ और ‘जय श्रीराम’ के उद्घोष से वातावरण गूंजता रहा। इस दौरान विनोद दीक्षित, महेंद्र दीक्षित, भगवान दीक्षित, सुमन्त दीक्षित, हरिशंकर दीक्षित, अजय दीक्षित, भगवती यादव आदि उपस्थित रहे।




