देवरिया में गोरखपुर रोड स्थित रेलवे ओवरब्रिज के पुराने विवाद ने एक बार फिर तूल पकड़ लिया है। सदर विधायक डॉ. शलभमणि त्रिपाठी ने साफ कहा है कि इस मामले को उठाने के बाद उन्हें धमकियां मिल रही हैं, लेकिन वह सनातनी हैं और किसी भी तरह की धमकी से डरने वाले नहीं। उन्होंने सख्त लहजे में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार में दहशत फैलाने वालों को “कुत्ते की मौत मारा जाता है”।

विवाद की जड़ – कब्रिस्तान घोषित की गई भूमि
विधायक ने बताया कि गोरखपुर रोड पर बना यह ओवरब्रिज जिले का सबसे पुराना पुल है, जो आज भी सिंगल लेन है। जनसंख्या बढ़ने के कारण इसे डबल लेन करने की योजना बनी थी और इसके लिए जमीन भी चिह्नित हुई थी। लेकिन सपा शासनकाल में अचानक उस जमीन को कब्रिस्तान घोषित कर दिया गया, जिससे परियोजना ठप हो गई।
डॉ. शलभमणि का आरोप है कि विवादित भूमि असल में बंजर और कुर्ना नाले की जमीन थी, जिस पर धीरे-धीरे मजार के नाम पर कब्जा कर लिया गया। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि लगभग 28 साल पहले संघ के वरिष्ठ प्रचारक रामनगीना यादव ने इस मजार की वैधता पर सवाल उठाए थे, जिसके बाद उनकी हत्या कर दी गई थी। तभी से लोग इस मुद्दे पर चुप्पी साधे हुए थे।
सीएम योगी ने दिए जांच के आदेश
विधायक ने बताया कि 2017 में भी इसी भूमि पर अवैध कब्जे का मामला दर्ज हुआ था और एक लेखपाल समेत चार लोगों पर मुकदमा चला था, लेकिन मामला दबा दिया गया। अब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के संज्ञान में आने के बाद डीएम और एसपी को विस्तृत जांच रिपोर्ट देने का आदेश जारी किया गया है।
धमकी के बाद साइबर सेल जांच में जुटी
इस बीच सोशल मीडिया पर एक शख्स ने विधायक और मुख्यमंत्री को धमकी दी है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक ने जांच साइबर सेल को सौंप दी है। विधायक का कहना है कि वह जनहित के मुद्दों पर हमेशा खुलकर आवाज उठाते रहेंगे और किसी भी दबाव या धमकी से पीछे नहीं हटेंगे।




